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Raksha Bandhan Shubh Muhurat

Raksha Bandhan Shubh Muhurat

भाई-बहन के खूबसूरत रिश्ते की झलक देने वाला त्यौहार रक्षाबंधन हिन्दू धर्म के मुख्य पर्वों में एक है। श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। प्राचीन वृतांतों में राखी की जगह रक्षा सूत्र बांधने की बात कही गई है। भविष्यपुराण में यह लिखा गया है कि देवराज इन्द्र की पत्नी शची ने इन्द्र को रक्षा सूत्र बांधकर उसे अपराजित बना दिया था। मुगल काल में चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर अपना भाई बनाया था। बाद में हुमायूं ने गुजरात के राजा के आक्रमण से चित्तौड़ की रक्षा की थी। मान्यता है कि द्वापर युग में द्रौपदी ने श्रीकृष्ण के हाथ में चोट लगने पर कपड़ा बांधा जिसके बाद उन्होंने द्रौपदी को बहन मानकर उसकी रक्षा का वादा किया था। इस दिन महाराष्ट्र में नारियल पूजन किया जाता है।

वर्ष 2015 में रक्षा बंधन का त्यौहार 29 अगस्त ,शनिवार को मनाया जाएगा।

इस बार भी रक्षाबंधन पर भद्रा का योग बन रहा है। रक्षाबंधन पर भद्रा होने से दोपहर बाद ही भाइयों की कलाई पर राखी सजेगी। भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। लगातार तीसरे साल रक्षाबंधन पर भद्रा का योग बन रहा है।

पूर्णिमा तिथि 29 अगस्त को सुबह लगभग 4 बजे प्रारंभ होगी, जो रात लगभग 12.05 तक रहेगी। वहीं 28 अगस्त की रात 12 बजे बाद लगभग 2:30 से भद्रा शुरू होगी, जो 29 अगस्त को दोपहर लगभग 13:50 तक रहेगी। वैसे तो भद्रा काल में रक्षाबंधन नहीं करना चाहिए, लेकिन ज्यादा ही जरूरी हो तो निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार, भद्रा के विष्टी पुच्छ काल में रक्षाबंधन किया जा सकता है।

विष्टी पुच्छ काल भद्रा का आखिरी समय होता है, जो कि लगभग साढ़े तीन घंटे का होता है। 29 अगस्त को सुबह लगभग 10:20 बजे से ये समय शुरू होगा और भद्रा खत्म होने तक रहेगा, यानी यानी दोपहर लगभग 1:50 तक। भद्रा में इसलिए नहीं बंधती राखी

ज्योतिष में कुल 11 करण हैं। इनमें 4 स्थिर व 7 चर होते हैं। इनमें भद्रा भी एक करण है, जो शुभ नहीं है। प्रत्येक मास के एक पक्ष में 4 बार भद्रा करण आता है। भद्रा को दरिद्र माना गया है। इसलिए भद्रा काल में विवाह, रक्षाबंधन सहित कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते।

रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त

दोपहर 12 बजे से 12:50 बजे तक (जरूरी हो तो)

चौघड़िया मुहूर्त
दोपहर 12:28 बजे से 02:02 बजे तक- चल (जरूरी हो तो)
दोपहर 03:37 बजे से शाम 5:12 बजे तक- अमृत
शाम 6:47 बजे से रात 8:12 बजे तक – लाभ

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