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PARAD SHIVLING

PARAD SHIVLING

पारद शिवलिंग(PARAD SHIVLING)

शिव भगवान के निराकार रूप का प्रतीक ‘शिवलिंग’ है। उनके निश्चल ज्ञान और तेज का यह प्रतिनिधित्व करता है। ‘शिव’ का अर्थ है – ‘कल्याणकारी’, ‘लिंग’ का अर्थ है- ‘सृजन’। शिवलिंग की पूजा जल, दूध, बेलपत्र से की जाती है। सर्जनहार के रूप में उत्पादक शक्ति के चिह्न के रूप में लिंग की पूजा होती है। शिवलिंग भगवान शिव और देवी शक्ति (पार्वती) का आदि-आनादी एकल रूप है तथा पुरुष और प्रकृति की समानता का प्रतिक भी अर्थात इस संसार में न केवल पुरुष का और न केवल प्रकृति (स्त्री) का वर्चस्व है अर्थात दोनों सामान है | आमतौर पर शिवलिंग को गलत अर्थों में लिया जाता है, जो कि अनुचित है या उचित यह हम नहीं जानते। वायु पुराण के अनुसार प्रलयकाल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और पुन: सृष्टिकाल में जिससे प्रकट होती है उसे लिंग कहते हैं। इस प्रकार विश्व की संपूर्ण ऊर्जा ही लिंग की प्रतीक है।
स्कन्दपुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है। धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है |वातावरण सहित घूमती धरती या सारे अनन्त ब्रह्माण्ड (ब्रह्माण्ड गतिमान है) का अक्स/धुरी (axis) ही लिंग है।पुराणो में शिवलिंग को कई अन्य नामो से भी संबोधित किया गया है जैसे : प्रकाश स्तंभ/लिंग, अग्नि स्तंभ/लिंग, उर्जा स्तंभ/लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ/लिंग | ब्रह्माण्ड में दो ही चीजे है : ऊर्जा और पदार्थ| हमारा शरीर प्रदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा है| इसी प्रकार शिव पदार्थ और शक्ति ऊर्जा का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते है | ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त ठोस तथा उर्जा शिवलिंग में निहित है. वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्मांड की आकृति है |
शिवलिंग दो शब्दों से बना है, शिव और लिंग। शिव का अर्थ है- परम कल्याणकारी और लिंग का अर्थ है- सृजन अथवा निर्माण। दूसरे शब्दों में शिवलिंग का अर्थ होता है- भगवान शंकर का यौन अंग। शिव के वास्तविक स्वरूप से अवगत होकर जाग्रत शिवलिंग का अर्थ होता है- प्रमाण, वेदों और वेदान्त में लिंग शब्द सूक्ष्म शरीर के लिए आता है।शिवलिंग की वेदी, महावेदी और लिंग भगवान शंकर है। सिर्फ लिंग की ही पूजा करने से त्रिदेव एंव आदि शक्ति की पूजा हो जाती है। शान्ति और परम आनन्द का प्रमुख स्रोत है, ईश्वर सभी उत्कृष्ण गुणों से परिपूर्ण है। प्रत्येक मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, यह उसकी स्वाभाविक प्रकृति है। सारी सृष्टि ही शिवलिंग है। इसका एक-एक कण शिवलिंग में समाहित है।
शिवनिर्णय रत्नाकर :-

मृदा कोटिगुणं सवर्णम् स्वर्णात् कोटिगुणं मणे:|
मणात् कोटिगुणं त् कोटिगुणं वाणो वनत्कोतिगुनं रसः|
रसात्परतरं लिङ्गं न् भूतो न भविष्यति||

अर्थात् मिट्टी या पाषाण से करोड़ गुना अधिक फल स्वर्ण निर्मित शिवलिंग के पूजन से मिलता है | स्वर्ण से करोड़ गुना अधिक मणि और मणि से करोड़ गुना अधिक फल बाणलिंग नर्मदेश्वर के पूजन से मिलता है |स्वर्ण से करोड़ो गुना अधिक मणि और मणि से करोड़ो गुना अधिक फल बाणलिंग नर्मदेश्वर के पूजन से प्राप्त होता है |नर्मदेश्वर बाणलिंग से भी करोड़ो गुना अधिक फल पारद निर्मित शिवलिंग (रसलिंग) से प्राप्त होता है |इससे श्रेष्ठ शिवलिंग न तो संसार में हुआ है और न हो सकता है|
पारद शिवलिंग दर्शन मात्र से ही मोक्ष का दाता है इसके पूजा गृह में रहने मात्र से ही सुयश, आजीविका में सफलता, सम्मान. पद प्रतिष्ठा ऐवम लक्ष्मी का सतत आगमन होता है।पारद शिवलिंग भुक्ति एवं मुक्ति का दाता है एवं इनकी प्राप्ति में ही जीवन की पूर्ण सार्थकता है।पारद का शोधन कर उसे ठोस रूप में परिणत करना अत्यंत कठिन एवं असम्भव को सम्भव में बदल देना है अतः पारद शिवलिंग अत्यंत दुर्लभ है। तथापि सौभाग्य से जो व्यक्ति इस दुर्लभ पारद शिवलिंग को प्राप्त कर अपने घर में इसकी पूजा करते हैं वे व्यक्ति स्वयं भी इस जगत में धन धान्य पूर्ण तथा सुख सुविधा पूर्ण जीवन यापन करते हैं। जीवन में जो लोग उन्नति के शिखर पर पहुचना चाहते हैं। या जो लोग आर्थिक, राजनौतिक, व्यापारिक सफलता चाहते हैं उन्हें पारद शिवलिंग का पूजन अपने घर में अवश्य करना चाहिये। यह मोक्ष प्राप्ति का अद्वितीय एवम सुनिश्चित साधन है।रुद्रसंहिता के अनुसार बाणासुर एवं रावण जैसे शिव भक्तों ने अपनी वांछित अभिलाषाओं को पारद शिवलिंग के पूजन के द्वारा ही प्राप्त किया एवम लंका को स्वर्णमयी बनाकर विश्व को चकित कर दिया | पारद शिवलिंग प्रायः दो प्रकार के देखने को मिलते हैं |एक पूर्ण ठोस जिसकी चल प्रतिष्ठा कर घर में पूजन होना चाहिए | दूसरा प्रकार आश्चर्यचकित कर देने वाला है | इसमें पारा मुर्छित एवं कीलित किया जाता है यह गोल एवं भरी होता है जिससे भक्त प्रतिदिन शिवलिंग बना एवं मिटा सकते हैं |
पारद पूर्ण जीवित धातु है इसके साथ सोना रख देने पर सोने को खा जाता है| दो चार दिन में ही सोना राख़ के रूप में आपके सामने होगा एवं मात्र पारद ही उस पात्र में बचेगा| पारद का मात्र स्पर्श ही सोने पर आश्चर्यचकित हासोन्मुखी प्रभाव डालता है| पारद हाथ में लीजिए एक मिनिट में ही आपकी अंगूठी का रंग सफ़ेद हो जाएगा इसकी सजीवता का इससे बड़ा प्रत्यक्ष प्रमाण क्या हो सकता है| पारद शिवलिंग का वजन अत्यधिक होता है दूसरी कोई धातु इतनी वजनी नहीं होती|
सर्वदर्शन संग्रह:-

अभ्रकं तव बीजं तु मम बीजं तु पारद:
बद्धो पारद्लिङ्गोयं मृत्युदारिद्रयनाशनम्|

अर्थात् स्वयं भगवान शिवशंकर भगवती पार्वती से कहते हैं कि पारद को ठोस करके तथा लिंगाकार स्वरुप देकर जो पूजन करता है उसे जीवन में मृत्यु भय व्याप्त नहीं होता और किसी भी हालत में उसके घर दरिद्रता नहीं रहती।
आदिदेव महादेव ही, ऐसे दयालु हैं जो भक्त के दोषो को अनदेखा करते हुए अल्पायु मानव को अमरत्व का वरदान प्रदान कर देते हैं।

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