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जय शनिदेव

ॐ।
जय शनिदेव

आज शनि अमावस्या है, जब शनिवार के दिन अमावस्या का समय हो तो इसे शनि अमावस्या कहा जाता है. जो शनिदेव की कृपा पाने के लिए विशेष लाभकारी है. इस बार ये अमावस्या विशेष संयोग लेकर आ रही है. इस दिन विशाला नक्षत्र में शोभन योग है. यह योग यदि शनिवार के दिन हो तो इससे उस दिन का, तिथि और नक्षत्र का प्रभाव कई गुना अधिक बढ़ जाता है. इसके पहले शनि अमावस्या पर शोभन योग वर्ष 1987 में बना था. इस दिन पूजा-पाठ करने से आपको शनि की विशेष कृपा मिलेगी।

30 साल बाद शोभन योगआज के दिन का संयोग बन रहा है. यह योग दान-पुण्य से लेकर बाजार से खरीदी व नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ रहेगा।

ग्रहों की गणना अनुसार वर्तमान में शनि धनु राशि में मार्गी है। इसके साथ ही सवा दो दिन के लिए चंद्र-बुध वृश्चिक राशि में युतिकृत रहेंगे. चूंकि बुध चंद्रमा के पुत्र होने से पिता-पुत्र का वृश्चिक राशि में शनि के साथ होने पर द्वादश: योग निर्मित होगा. चंद्रमा वनस्पति तो बुध व्यापार का सूचक होने से आने वाले समय में फसलों और कारोबार दोनों में वृद्धि करेंगे. वहीं वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल भी कन्या राशि में परिभ्रमण कर रहा है. यह अवस्था भी परस्पर मंगल-बुध का राशि परिवर्तन कहलाती है. इससे नए कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होकर सफलता मिलेआज के दिन मनुष्य को सरसों का तेल, उड़द, काला तिल, देसी चना, कुलथी गुड शनियंत्र, और शनि संबंधी समस्त पूजन सामग्री अपने ऊपर वार कर शनिदेव के चरणों में चढ़ाकर शनिदेव का तैलाभिषेक करना चाहिए।

शनि अमावस्य के दिन श्री शनिदेव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंती हैं. कालसर्प योग, ढैय्या तथा साढ़ेसाती सहित शनि संबंधी अनेक बाधाओं से मुक्ति पाने का यह दुर्लभ समय होता है जब शनिवार के दिन अमावस्या का समय हो जिस कारण इसे शनि अमावस्या कहा जाता है।

शनि अमावस्या पितृदोष से मुक्ति दिलाए

अमावस्या का विशेष महत्व है और अमावस्या अगर शनिवार के दिन पड़े तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है. शनिदेव को अमावस्या अधिक प्रिय है. शनि देव की कृपा का पात्र बनने के लिए शनिश्चरी अमावस्या को सभी को विधिवत आराधना करनी चाहिए. भविष्यपुराण के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या शनिदेव को अधिक प्रिय रहती है।

शनैश्चरी अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध अवश्य करना चाहिए. जिन व्यक्तियों की कुण्डली में पितृदोष या जो भी कोई पितृ दोष की पिडा़ को भोग रहे होते हैं उन्हें इस दिन दान इत्यादि विशेष कर्म करने चाहिए. यदि पितरों का प्रकोप न हो तो भी इस दिन किया गया श्राद्ध आने वाले समय में मनुष्य को हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करता है, क्योंकि शनिदेव की अनुकंपा से पितरों का उद्धार बडी सहजता से हो जाता है।

शनि अमावस्या पूजन ।

पवित्र नदी के जल से या नदी में स्नान कर शनि देव का आवाहन और दर्शन करना चाहिए. शनिदेव का पर नीले पुष्प, बेल पत्र, अक्षत अर्पण करें. शनिदेव को प्रसन्न करने हेतु शनि मंत्र “ॐ शं शनैश्चराय नम:”, अथवा “ॐ प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम:” मंत्र का जाप करना चाहिए. इस दिन सरसों के तेल, उडद, काले तिल, कुलथी, गुड शनियंत्र और शनि संबंधी समस्त पूजन सामग्री को शनिदेव पर अर्पित करना चाहिए और शनि देव का तैलाभिषेक करना चाहिए. शनि अमावस्या के दिन शनि चालीसा, हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करना चाहिए. BM.com

जिनकी कुंडली या राशि पर शनि की साढ़ेसाती व ढैया का प्रभाव हो उन्हें शनि अमावस्या के दिन पर शनिदेव का विधिवत पूजन करना चाहिए।www.bhrigumantra.com

इस दिन महाराज दशरथ द्वारा लिखा गया शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए और उनके पास समय की कमी है वह सफर में शनि नवाक्षरी मंत्र अथव
“कोणस्थ: पिंगलो बभ्रु: कृष्णौ रौद्रोंतको यम:। सौरी..
“कोणस्थ: पिंगलो बभ्रु: कृष्णौ रौद्रोंतको यम:। सौरी: शनिश्चरो मंद:पिप्पलादेन संस्तुत:।।”मंत्र का जप करने का प्रयास करते हैं करें तो शनि देव की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
जय शनिदेव

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