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Hariyali Teej

Hariyali Teej

Hariyali or Singhara Teej: Wednesday, 30 July 2014

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को श्रावणी तीज कहते |। हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की तृतीय को हस्त नक्षत्र के दिन होता है।इस दिन कुमारी और सौभाग्यवती महिला गौरी शंकर की पूजा करती है ।यह श्रावणी तीज,हरियाली और कजली तीज के रूप में भी मनायी जाती है। इस समय जब प्रकृति चारों तरफ हरियाली की चादर सी बिछा देती है तो प्रकृति की इस छटा को देखकर मन पुलकित होकर नाच उठता है। जगह-जगह झूले पड़ते हैं। स्त्रियों के समूह गीत गा-गाकर झूला झूलते हैं। यह शिव-तथा गौरी की आराधना का दिन है। गौरी और शिव सुखद व सफल दांपत्य जीवन को परिभाषित करते हैं अतः इनकी पूजा इसी अभिलाषा से की जाती है कि वे पूजन तथा व्रत करने वाली को भी यही वरदान दें। इस त्योहार के विषय में मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी उससे प्रसन्न होकर शिव ने हरियाली तीज के दिन ही पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।पार्वतीजी के 108वें जन्म में शिवजी उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न हुए ।
भारत में कई स्थानों पर कुँवारी युवतियाँ भी इस दिन अच्छे वर की कामना से व्रत रखती हैं। यह दिन स्त्रियों के लिए श्रृंगार तथा उल्लास से भरा होता है। हरी-भरी वसुंधरा के ऊपर इठलाते इंद्रधनुषी चुनरियों के रंग एक अलग ही छटा बिखेर देते हैं। स्त्रियाँ पारंपरिक तरीकों से श्रृंगार करती हैं तथा माँ पार्वती से यह कामना करती हैं कि उनकी जिंदगी में ये रंग हमेशा बिखरे रहें। विवाहित स्त्रियाँ इस दिन खासतौर पर मायके आती हैं और यहाँ से उन्हें ढेर सारे उपहार दिए जाते हैं, जिसे तीज का शगुन या सिंजारा कहा जाता है। इसी तरह जिस युवती का विवाह तय हो गया होता उसे उसके ससुराल से ये सिंजारा भेजा जाता है।हरियाली तीज के दिन अनेक स्थानों पर मेले लगते हैं और माता पार्वती की सवारी बड़े धूमधाम से निकाली जाती है।
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज के रूप में राजस्थान और मध्यप्रदेश खासतौर पर मालवांचल की महिलाएँ बहुत श्रद्धा और उत्साह से मनाती हैं।मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा के ब्रज क्षेत्र में उनकी आराधना का अनूठा हिंडोला उत्सव हरियाली तीज पर इसे देखने के लिए लाखों तीर्थयात्री वृन्दावन पहुंचते हैं।हरियाली तीज से पंचमी तक स्वर्ण हिंडोला और उसके बाद चांदी फूल, पत्ती, जड़ाऊ आदि का हिंडोला डाला जाता है। सप्त देवालयों में अपनी अलग पहचान रखे राधा दामोदर मंदिर में भी हरियाली तीज से झूलनोत्सव शुरू हो जाता है और विभिन्न छटाओं में कुंज निकुंज में राधा दामोदर के दर्शन होते हैं।सोने चांदी के साथ साथ जरी, फल-फूल, पत्ती आदि के हिंडोले बदल-बदल कर डाले जाते हैं और भाव यह रहता है कि राधा और गोपियां श्रीकृष्ण को झुलाएंगी। यदि वह प्रसन्न होंगे तो कल्याण निश्चित है।
उत्तर को दक्षिण से जोड़ने वाले रंगनाथ मंदिर में यद्यपि सभी परंपराएं दक्षिण के मंदिरों के अनुसार होती हैं किंतु इस मंदिर में भी हरियाली तीज से सभी मंदिरों की तरह चांदी का हिंडोला डाला जाता है।
हिंडोला ,हरियाली तीज की शुभ कामनाएं।

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