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Hariyali or Shravana Shani Amavasya

Hariyali or Shravana Shani Amavasya

सनातन संस्कृति में अमावस्या का विशेष महत्व है और अमावस्या अगर शनिवार के दिन पड़े तो इसका मतलब सोने पर सुहागा से कम नहीं।
शनि की कृपा का पात्र बनने के लिए शनिश्चरी अमावस्या को सभी जातकगण विधिवत आराधना करें। भविष्यपुराण के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या शनिदेव को अधिक प्रिय रहती है।जिन जातकों की कुंडली में साढ़ेसाती व ढैया का योग है। वे इस दिन शनिदेव का पूजन कर अच्छी सफलता प्राप्त कर दुष्परिणामों से छुटकारा पा सकते हैं। श्रावण कृष्ण अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 26 जुलाई 2014 को आ रहा है।
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सावन के महीने में भगवान शंकर की विशेष रूप से पूजा करें | शिवलिंग पर रूद्रपाठ करते हुए गंगा जल, दूध या दही से अभिषेक करें और साथ में काले तिल जरूर अर्पित करें।

-महादेव को पंचामृत और गन्ने के रस से भी अभिषेक करने से प्रसन्न होते हैं।

-तेल में बनी खाद्य सामग्री का दान गाय, कुत्ता व भिखारी को करें।
-विकलांग व वृद्ध व्यक्तियों की सेवा करें।
-इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा कर उसके फेरे लगाने तथा मालपुए का भोग लगाने की परंपरा है।
– ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन हर व्यक्ति को एक पौधा अवश्य रोपना चाहिए।

धार्मिक मान्यता अनुसार वृक्षों में देवताओं का वास बताया गया है। शास्त्र अनुसार पीपल के वृक्ष में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु व शिव का वास होता है। इसी प्रकार आंवले के पेड़ में लक्ष्मीनारायण के विराजमान की परिकल्पना की गई है। इसके पीछे वृक्षों को संरक्षित रखने की भावना निहित है।
पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए ही हरियाली अमावस्या के दिन वृक्षारोपण करने की प्रथा बनी।
मध्यप्रदेश में मालवा व निमाड़, राजस्थान के दक्षिण पश्चिम, गुजरात के पूर्वोत्तर क्षेत्रों, उत्तरप्रदेश के दक्षिण पश्चिमी इलाकों के साथ ही हरियाणा व पंजाब में हरियाली अमावस्या को इसी तरह पर्व के रूप में मनाया जाता है।

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